शनिवार, 14 मई 2011

मत बेच तू अपनी जमीन

सरकार      बनी  है   भगवान
करे     क्या   बेचारा   किसान
खत्म   होंगे   खेत  खलिहान
बनेगा किसान के सपनो का शमशान




रास्ट्रपिता की कुटीया भी
अब विकाश की भेंट चढ़ेगा
भारत अब शहरो में बसेगा
हर गांव का शमशान गढ़ेगा


 


मरते किसान गांव  में
सोती सरकार शहर  में
अब भटकना नहीं पड़ेगा
बेचारे किसान को दोपहर में
   
कर्मभूमि को बचाने में
गुंडे की उपाधि पाई है 
खुद लुटते जमीं, कहते गुंडे
बेशर्मी ने क्या अगन लगाई है 

 

 हे किसान अपनी सक्ती जान
तुझसे है  स्वदेश का सम्मान
तू देता भारत को नयी पहचान
मत कर तू खुद अपना अपमान

 


देना बस दो गज जमीन
जिसपे हो शहीदों का शव आसीन
मत बेच तू अपनी जमीन 

मत बेच तू अपनी जमीन

1 टिप्पणी:

बेनामी ने कहा…

kisan vastav me is desh ki jaan hai,uski raksha karna har bhartiya ka dharm hona chahiye anyatha desh mit jayega.
ajay jarhi , c.g.