शुक्रवार, 12 अगस्त 2011

आरक्षण

आरक्षण राजनीती ...........प्रकाश
आरक्षण नाम अभी बहुत सुना सुना सा लगता है प्रकाश झा की फिल्म है दरअसल प्रकाश झा जिस जमीं से आते है वह आरक्षण से आहात भारत की सबसे दर्दनाक तस्वीर पेश करता है | आरक्षण को अब तक तीन राज्यों की सरकारों ने सेंसर कर दिया पर इन सबके बीच प्रकाश झा ने १२ अगस्त को अपनी फिल्म रिलीज कर दी| प्रकाश झा बेतिया पश्चिमी चंपारण बिहार के जिस छेत्र से आते हैं वह उन्होंने आरक्षण राजनीती अपहरण इन सरे चीजो को बड़ी नजदीकी से महसूस किया है दरअसल प्रकाश झा की फ़िल्मी सफ़र को देखे तो पता चलता है की उन्होंने सबसे ज्यादा उन्ही चीजो पर फिल्मे बने है जिसे उन्होंने बड़े करीब से देखा और संयोग से सारे विषय भी बिहार से बड़े नजदीक से जुड़े थे | पर यह संयोग मात्र नहीं है  प्रकाश झा की अधिकतर फिल्मो ने नेशनल अवार्ड जीते हैं |
                                                                                                                                                                             उनकी फिल्मो को देखने से पता चलता है की उन्होंने भारत की उस दुखती रग पर हरदम हाथ रखा यही कारण रहा की वो हमेशा ही भारतीय राजनीती के निशाने पर भी रहे आज जिन लोगो के निशाने पर वो है| दरअसल वो यह जानते है, की अगर जिन मुद्दों पर  प्रकाश बहस शुरू करना चाहते है वह उनके लिया घातक है| प्रकाश झा ने सुप्रीम कोर्ट में जो याचिका दायर की है उसमे भी उन्होंने यही बात कही है | की बहस चर्चा हमारा अधिकार है | मायावती ने आरक्षण पर दो महीने का प्रतिबन्ध लगाया है उत्तर-प्रदेश और बिहार की राजनीती का आधार आरक्षण ही है, जहाँ  हर जाती का एक अपना trademark   नेता हो तथा विकाश नहीं बल्कि आरक्षण की चक्की में लोगो को पीसकर अपनी रोटी सेकना ही राजनीती की बुनियाद हो ऐसे में मायावती लालू या पुनिया कौन ये चाहेगा की उनकी नीव में पानी डालकर उनकी मजबूती जांचने  का कोई प्रयास करे , इसीलिए जिस को पूरा देश सुपरस्टार कहता है तथा जिसके बीमार होने भर से लाखो लोग फिल्मे देखना छोड़ देते है, उस अमिताभ बच्चन को लालू ने देश के  सबसे नापसंद कलाकार की संज्ञा दे दी जीस  आरक्षण की लालू यादव बात कर रहे थे उनके राज्य में भी आरक्षण के रहते ही उन्होंने १५ सालो तक बिहार का बेडा कैसे गर्क किया तभी अपहरण फिल्म बनाकर प्रकाश ने बिहार में फल फुल रहे सबसे सफल उद्योग की तस्वीर लालू को दिखाई थी | लालू आज भी इस बात से बहुत खफा लगते हैं ...........
                                                                                                                                                                                                                प्रकाश झा राजनीती में हरदम फेल रहे क्योकि उन्होंने आरक्षण का सहीं इस्तेमाल नहीं किया २००४ और २००९ में चुनाव हरने के बाद उन्होंने भी आरक्षण को समझने की कोशिश की पर इस बार भी वो राजनीती की भेट चढ़ते दीखते हैं|
                                                                                                                                                                                                                              क्योकि उन्होंने आरक्षण का इस्तेमाल सपेरे के पिटारे की तरह नहीं बल्कि मदारी के बन्दर की तरह किया और इसीलिए वो राजनीती में हरदम फेल रहे पर लालू और मायावती सरीखे लोग भी यह समझे की जिस दिन बहस के बाद लोग प्रकाश के आरक्षण को समझेंगे  तब लालू मायावती फेल होंगे और भारत का लोकतंत्र और लोग पास ..........................

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