आज हर ओर एक ही नाम हर तरफ सुनाई देता है अन्ना हजारे कुरता पायजामे और गाँधी टोपी में ७२ साल का एक वृद्ध पुरुस इस उम्र में लोग दुनिया से विरक्त हो जाते है अन्ना ने अपने एक नए जीवन की शुरुआत की है जिसमे देस के १२१ करोड़ लोगो को गाँधी का अक्स दीखता है अन्ना हजारे के नाम से जाने जाने वाले अन्ना हजारे का पूरा नाम किशन बाबुराव हजारे है महारास्त्र के एक छोटे से गाँव भिंगर कसबे में जन्मे अन्ना हजारे आज जिस बदलाव को लाने की बात कर रहे है बहुत कम लोग जानते है की अन्ना ने अपने जीवन की शुरुआत ४० रुपये महीने की पगार पर फुल बेचकर की ६० के दसक के आसपास अन्ना ने फ़ौज में ड्राईवर की नौकरी की अन्ना की जिंदगी को सही मायनो में विवेकानंद की 'कॉल टु दि यूथ फॉर नेशन' ने बदला जो उन्होंने नयी दिल्ली के उसी रेलवे स्टेशन से ख़रीदा था जिस स्टेशन पर उतरकर अन्ना ने जंतर मंतर का रास्ता पकड़ा अपने 15 साल फ़ौज में पुरे करने के बाद अन्ना ने 1975 में विआरस ले लिया था और अपने गाव की तक़दीर बदलने में जुट गए थे और बदला भी था
दरअसल अन्ना ने हर चीज बदली है चाहे अपने पैत्रिक रालेगाव सीधी में वर्ष जल संग्रह करने का कम हो सौर उर्जा और बिओगास का प्रयोग हो अन्ना ने हर जगह बदलाव को महसूस किया है
अन्ना ने अपने इस समाजसेवा वाली छवि की शुरुवात अपने पैत्रिक गावं से की और उन्होंने इसके लिए आजीवन अविवाहित रहने का फैसला किया आज हालत यह है की अन्ना की कोशिश से गावं में रामराज वाली स्थिति है दरअसल आज देश के पास जो है उसी को अन्ना अपना मानते है और उनके पास जो है उसको अन्ना ने पहले ही देश को समर्पित कर दिया है दरअसल अन्ना ने भारत का हर पहलु को सिर्फ देखा ही नहीं जिया भी है इसलिया अन्ना एक फौजी की कठोरता भी रखते है और समाज को समझने वाला कोमल ह्रदय भी है
अन्ना के इस रवैये से समाज के कुछ लोगो को चाव्काया भी क्युकी तब ख्याल आता है नसीरुद्दीन सह की पिक्चर अ वेडनेसडे का जिसमे वही अनुपम खेर जो आज प्रधानमंत्री को अन्ना के सही होने की बात कह रहे है कहा था की तुम्हारी मांगे समझ में नहीं आती दरअसल वह नसरुद्दीन सह ने चार आतंकियो को ब्लाच्क्मैल कर मरने की शर्त राखी थी
दरअसल आज भारतीय समाज की सोच वैसी बन चुकी है की सहना आम आदमी की छवि है और उस व्यवस्था के खिलाफ खड़ा होना उसे आम आदमी रहने नहीं देता तभी तो आज सरकार कहती है की अन्ना सरकार पर अपनी मांगे मनवाने का दबाव बना रहे है बड़ा हास्यास्पद लगता है जो सरकार पुरे तंत्र पर भारी पड सकती है जो सर्वोच्च नयायालय में खेल खेल सकती है जिसमे खेल में शामिल प्यादे भी पोल खुलने की डर से बिच में ही निपटा दिए जाते हो और उसके बाद भी प्रधानमंत्री ये कहे की सब्र रखो तो सब्र रखे किसके आसरे क्या पञ्च साल बाद फिर होनेवाले चुनाव के इंतजार के आसरे पर इसी सब्र का बांध आज टुटा है अन्ना ने एक नयी रौशनी जगाई है
इसिलिया आज जब कभी फ़ौज में ड्राईवर रहा ७२ साल के इस बुजुर्ग ने देश को चलाने का मसौदा तैयार करने की बात की तो सर्कार सहमी हुई है दरअसल गाँधी ने जीवनभर जिस कांग्रेस को खड़ा किया आज उसी कांग्रेस को एक गांधीवादी ने ही चुनौती दी है सरकार इसलिए भी पसोपेश में है दरअसल इसमें भाजपा की स्थिति भी सप छुछुंदर वाली है क्युकी कभी अन्ना ने शिव्शेना की बीजेपी समर्थित सरकार के मुख्यमंत्री मुरली मनोहर जोशी भी उनकी आंच से नहीं बच पाए महार्स्त्र के सभी दल अन्ना की ताकत को जानते है क्युकी अन्ना के पास कुछ छुपा हुआ नहीं है अन्ना के पास जो है उसे वह अपनी हथेली पर रखते है सरकार जानती है की जिस समाजसेवी ने महारास्त्र के तीन मुख्यमंत्री को अपनी आंच महसूस कराइ है वह मामूली आदमी हो नहीं सकता क्युकी इसी अंहिसा के रास्ते कांग्रेस को ढाल बनाकर कभी गाँधी ने ब्रिटिश हुकूमत को धता बताया था और अंग्रजो को देश छोड़कर भागने पर मजबूर भी कर दिया था

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