आखिर मान गए अन्ना,
देखा एक अविस्वस्नीय सपना'
संघर्ष का मशाल जला
भारत क्रांति की राह चला,
मनमोहन की मंद चाल
देख लोगो में आया उबाल
खत्म होगा भ्रस्ताचार ,
भ्रस्ताचारी होंगे बेहाल
देश को फिर एक गाँधी मिला
भारत क्रांति की रह चला
कुछ करने की हो ललक तो
आंधियो में चिराग जलते है
भारत जैसे लोकतंत्र में ही
ऐसे गाँधी मिलते है
अहिंसा की फिर से ज्योत जला
भारत क्रांति की राह चला
नया सवेरा आएगा ऐसी अब है हवा चली
काले अंधियारों के बाद अब है फिर धुप खिली
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